ग्रामीणों ने बताया की जब से यह गौशाला बनी है और उसमें हो रही गोवंश ओं की मौत के कारण उनको खुले में फेंक दिया जाता है उनको कुत्ते नोच नोच कर खाते हैं और फिर जब गोवंश का शव सड ने लगता है और तेज हवाओं के साथ उनकी बदबू गांव में होते हुए हमारे घरों में आती है जिस कारण हमारे घर के बच्चे बीमार हो रहे हैं जिसकी शिकायत कई बार हम लोग जिला स्तर पर कर चुके है लेकिन कहीं कोई भी सुनवाई नहीं की जा रही है आज इस गौशाला में बरसात होने के कारण पूरी गौशाला कीचड़ से भर कर दलदल में तब्दील हो गई है जिस में फंसकर गोवंश हॉकी तड़प तड़प कर भूख प्यास से मौत हो रही है गौशाला में लगे कर्मचारी उन गोवंश ओं की मौत का तमाशा देखते रहते हैं और अपने साथियों के साथ हंसी ठिठोली करते हैं गोवंश की चीख-पुकार भी इन
गौशाला कर्मियों को सुनाई नहीं देती है जहां सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि किसी भी गौशाला में धन की कमी नहीं है और धन की कमी की वजह से किसी भी गौशाला में गौ वंश की मौत नहीं होगी लेकिन इटावा जिले की इस गौशाला का नजारा देखते ही बन रहा है जहां अधिकारियों ने दबी जुबान में कहा 1 गोवंश के ऊपर पूरे दिन में हमें सिर्फ ₹30 दिए जाते हैं जिससे उसका पूरा खर्चा चलाना है लेकिन जमीनी स्तर की बात की जाए तो 1 गोवंश के ऊपर न्यूनतम 80 से ₹100 का खर्चा सिर्फ खाने का ही आता है और रखरखाव के लिए लगे कर्मचारियों की तनखा अलग से देनी पड़ती है आज हुई इस गौशाला में 25 गोवंश की मौत का आखिर जिम्मेदार कौन होगा यह सवाल आम जनता पूछ रही है गोवंश की मौत की जानकारी आला अधिकारियों को होने पर उनके हाथ पैर फूलने लगे और उन्होंने तत्काल प्रभाव से जेसीबी लगाकर उन भवनों को वहां से हटाकर खुदे हुए गड्ढों में दबा दिया गया जिससे मीडिया कर्मी पहुंचे तो उन्हें गोवंश के शव ना मिले।
इटावा से महावीर सिंह यादव की रिपोर्ट


