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गठबंधन नहीं होने पर समस्त 200 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार : उम्मेद सिंह चम्पावत

गांधी जयन्ती के अवसर राकांपा के नवनियुक्त प्रदेशाधय्क्ष के बयान से राजनीतिक हलके में हड़कंप



जयपुर । गांधी जयन्ती के अवसर पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष उम्मेद सिंह चम्पावत के जयपुर सम्मान समारोह के दौरान समर्थकों की भारी तादात ने संभवतः राजस्थान की राजनीती में यह पहला मौका था, जिसमें कांग्रेस और भाजपा की टक्कर में समर्थकों की भीड़ जुटी. यह कहना गलत नहीं होगा कि राजस्थान में तीसरे मोर्चे के गठन की नींव रखी जा चुकी है.


उम्मेद सिंह चम्पावत को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बनाने से प्रदेश की जनता को नया विकल्प मिल गया तथा चम्पावत के मैदान में आ जाने से नए समीकरण बनने की संभावना है. एनसीपी ने उद्यमी व राजनेता उम्मेद सिंह चंपावत को राजस्थान की बागडोर सौंपकर प्रदेश में अपनी पकड़ तेज करने का प्रयास शुरू कर दिया है. भाजपा से नाराज राजपूत, ब्राह्मण व मुस्लिम मतदाताओं पर उनकी सीधी नजर है.


देश के पूर्व उपराष्ट्रपति व राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत भैरों सिंह शेखावत के खिलाफ चुनाव लड़कर चर्चा में आए उद्यमी उम्मेद सिंह चम्पावत लंबे समय से राजस्थान की राजनीति में सक्रिय हैं तथा अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं. मारवाड़ की बाली सीट से उनका विधानसभा चुनाव लड़ना पहले से तय है, लेकिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की बागडोर संभालने के बाद अब वे सभी 33 जिले व सवा दो सौ तहसीलों में संगठन के पांव पसार रहे हैं.


चंपावत कहते हैं कि कांग्रेस से सम्मानजनक समझौता होता है तो ठीक अन्यथा सभी दो सौ सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी है. चंपावत बताते हैं कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पंवार ने कांग्रेस को नुकसान किए बिना अपना राजनीतिक वजूद खड़ा करने को कहा है. महाभारत के पांडवों की तरह वे कांग्रेस पांच गांव यानि कुछ सीट चाहते हैं, यदि इतनी भी नहीं मिलती हैं तो उनके लिए सभी विकल्प खुले हैं.


गौरतलब है कि गुजरात में कांग्रेस व एनसीपी के रिश्तों में आए उतार-चढ़ाव का सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस को हो चुका है. अहमदाबाद महानगर पालिका के बाद गुजरात की सत्ता के करीब पहुंचकर फिसल गई, इसलिए एनसीपी को उम्मीद है कि कांग्रेस अब यह गलती नहीं दोहराएगी.


उम्मेद सिंह खुद मारवाड मूल से आते हैं तथा शेखावाटी इलाके में उनकी अच्छी पकड़ है, पाली सिरोही को वे मिनी मुंबई बताते हैं. राजस्थान में विकास की विपुल संभावना बताते हुए चंपावत कहते हैं कि 20 साल में विकास हुआ लेकिन कछुआ चाल से. कोटा को एजुकेशन का एसईजेड बनाकर दुनिया के नामी विश्वविद्यालयों को खोल देना चाहिए. बाडमेर में रिफाइनरी लग जाती, तो प्रदेश का विकास अरब देशों जैसा हो सकता था. सौर ऊर्जा के क्षेत्र में गजब की संभावना है. चंपावत मानते हैं कि गुजरात की तरह राजस्थान में भी शराबबंदी होनी चाहिए, इससे अपराध कम होंगे महिलाएं व बच्चियां अधिक सुरक्षित महसूस करेंगी. शराब से होने वाली आय कम है नुकसान अधिक हैं, जितनी आय होती है उससे अधिक तो अफसर व दफ्तरों पर खर्च हो जाती है.


राजस्थान की राजनीति में जाति का अपना विशेष महत्व है, गैंगस्टर आनंद पाल व चतुर सिंह एनकाउंटर को लेकर राजपूत समाज मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से खासा नाराज है. रावणा राजपूत समाज तो खुलकर भाजपा के खिलाफ मैदान में उतर आया है. एससी-एसटी एक्ट को लेकर सवर्णों की भाजपा से नाराजगी एनसीपी के लिए बड़े फायदे का कारण बन सकती है. जो राजपूत, ब्राह्मण, बनिया, जाट तथा ओबीसी की कई जातियां भाजपा से नाराज हैं और सीधे कांग्रेस के पक्ष में जाने से बच रहे हैं, एनसीपी उनके लिए नया विकल्प बन सकती है. इस बार के चुनाव में उम्मेद सिंह चम्पावत को शरद पवार व पूर्व मंत्री प्रफुल्ल पटेल जैसे दिग्गज की छत्रछाया में पार्टी को जगह बनाने में कम मुश्किल होगी.


उन्होंने ने बताया कि ''आज भी प्रदेश सड़क, शिक्षा, पानी तथा बिजली जैसी बुनयादी सुविधाओं से महरूम है. प्रदेश का यह चुनाव हम ठोस मुद्दों तथा भावी योजनाओं की स्पष्ट रणनीति पर लड़ेंगे.’’


प्रदेश के समुचित विकास हेतु हर किसान को समय पर बिजली व पानी की टिकाऊ व्यवस्था की जाएगी, गांवों के मुकदमों को त्वरित गति से निपटाने हेतु हर गाँव में ग्राम न्यायलय की स्थापना हेतु प्रयास किए जाएंगे. प्राकृतिक संसाधनों के दुरूपयोग पर रोक लगाई जाएगी. शैक्षणिक मज़बूती हेतु हर गाँव में उच्च माध्यमिक विद्यालय खोला जाएगा. हर तहसील व ज़िले में महाविद्यालय खोला जाएगा और बीमार पड़ी चिकत्सा व्यवस्था को दुरुस्त कर प्रत्येक गाँव व शहर में अत्याधुनिक अस्पताल भी खोला जाएगा, जिससे लोगों को सही समय पर उपचार व सलाह मिल सके. समूचे प्रदेश के लिए महिला सुरक्षा बड़ा मुद्दा है, जिसके लिए महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.


उनके अनुसार “प्रदेश आज भी पूरी तरह पिछड़ा है. मेरे चुनावी मुद्दों में वह सब कुछ है, जिससे प्रदेश को आधुनिक एवं अग्रिम बनाया जा सके. इस बार मैं प्रदेश के निवासीयों के सपनों को पूरा करने के रोड मैप के साथ आ रहा हूँ. मैं यह मानता हूँ कि यह रोड मैप वही बना सकता है, जो स्वयं बुनियादी रूप से मज़बूत हो, प्रखर हो तथा सरकार से सीधे संवाद करने की हिम्मत रखता हो.
चुनाव लड़ने के मेरे उद्देश्य को यदि एक पंक्ति में समझना हो तो वो है- ‘‘प्रदेश को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना, हर तबके को मज़बूत करना ताकि सब सौहार्द के साथ सर उठा कर चल सके.’’


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